📵 इस बार होली स्क्रीन पर नहीं… दिलों में मनाएँ 🎨❤️
" स्क्रीन से बाहर निकलें; इस होली रिश्तों को फिर से रंग दें "— राम कृष्ण ठाकुर जी का भावपूर्ण संदेश:- होली रंगों का त्योहार है, लेकिन उससे पहले यह रिश्तों का त्योहार है। समय बदला है, तरीक़े बदले हैं, और अब त्योहारों की यादें भी अक्सर मोबाइल स्क्रीन तक सिमट जाती हैं। बदलती तस्वीर: कुछ तथ्य भारत में औसतन एक व्यक्ति रोज़ लगभग 4–5 घंटे मोबाइल पर बिताता है। त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया उपयोग 30% से अधिक बढ़ जाता है। कई सर्वे बताते हैं कि पारिवारिक समारोह में भी लोग बार-बार फोन चेक करते हैं। सवाल यह है—क्या हम सच में साथ होते हुए भी साथ हैं? होली का मूल संदेश होली का सांस्कृतिक आधार हमें याद दिलाता है कि यह पर्व अहंकार के अंत और विश्वास की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथा में प्रह्लाद की आस्था और होलिका के दहन का अर्थ यही है—नकारात्मकता जलती है, संबंध बचते हैं। इसलिए होली केवल रंग लगाने का उत्सव नहीं, बल्कि मन के भीतर जमी धूल हटाने का अवसर है। इस होली एक संकल्प कम से कम कुछ घंटे “नो फोन” समय तय करें। पुराने मतभेदों को खत्म कर पहल करें। परिवार के साथ बैठकर...